तुम्हे चाहने की जो हमसे खता हो गयी ।।
तन्हा राते ही अब मेरी साथी हो गयी, तुम्हे चाहने की जो खता हो गयी ।। समझाया सबने मगर ये दिल माना ही नही, ये भूल जो मुझसे बड़ी हो गयी।। रोका क्यू ना था मैंने दिल को अपने, क्यों देखें थे की तुम रहोगी ये सपने।। सपनों की अब मेरे इंतिहां हो गयी तुम्हे चाहने…
