आंसू देख ले ना मेरे कोई शब्दों के जाल मे, आंसू को सुखा कर कलम की स्याही बनाएं जा रहा।।
गम तो गम फिर भी जिए जाना है, हंस हंस कर हर किसी को दिखाना है।। बुरे हालात बुरे चहरे कहा किसी को रास आते, लोगों को चहरा रंग बदल कर दिखाना है।। पूछता है यहां हर कोई क्यू रिश्ते मे ये बता, रिश्तों को आजकल शक की निगाह से देखा जाता।। क्यों कोई जुड़े…
