मुस्कुराहट के पीछे
ग़म तो ग़म है, फिर भी जीए जाना है,
हँस-हँसकर हर किसी को दिखाना है।।
बुरे हालात, बुरे चेहरे,
कहाँ किसी को रास आते हैं।
इसलिए हर रोज़
चेहरे का रंग बदलकर दिखाना है।।
पूछता है यहाँ हर कोई,
“रिश्ते में क्या रखा है?”
क्योंकि आजकल हर रिश्ता
शक की निगाह से देखा जाता है।।
क्यों कोई जुड़े हमसे
बिना किसी मतलब के?
आजकल तो हर साथ
मतलब देखकर चुना जाता है।।
बदलूँ अब कैसे
ये रंग-मिज़ाज मेरे,
मुझे तो अब
खुद ही समझ नहीं आता है।।
ना अब किसी को
करूँगा परेशान,
अपनी तकलीफ़ों को
अब हँसकर छुपाना है।।
घूमकर खुद को
ले आया हूँ फिर से वहीं,
अब किसी को
अपना दर्द नहीं बताना है।।
हालात पूछने के लिए
नहीं पूछता मैं किसी के,
हर रिश्ते को
दिल से निभाना आता है।।
दूर जा रहा हूँ अब
सबसे बिना किसी बात के,
बातों को अपने भीतर दबाकर
बस जीए जा रहा हूँ।।
लिखने के लिए
कुछ जज़्बात बचे थे,
अब धीरे-धीरे
शब्दों को भी दफ़्न किए जा रहा हूँ।।
कोई पढ़ न ले
मेरी आँखों का दर्द,
इसलिए आँसुओं को सुखाकर
कलम की स्याही बनाए जा रहा हूँ।।
— MySoloWord
✍️ शब्द जो दिल से दिल तक
