उस पार की दुनिया
जाने वो कैसी होगी उस पार की दुनिया,
सतरंगी होगी, अतरंगी होगी,
या होगी वो भी चाह की दुनिया।।
ज़िंदा होंगे वहाँ भी लोग,
या खुद में ही मर चुके होंगे।
यहाँ के जैसे ही होंगे,
या मोहब्बत के भूखे होंगे।।
बदलते होंगे क्या वहाँ भी लोग,
हालात देखकर हर बार?
या फिर दिल से दिल तक
चलता होगा हर एक का साथ।।
सुना है उस दुनिया में,
खुदा तू भी रहता है।
यहाँ जैसा ही है तेरा नज़रिया,
या वहाँ सच में इंसाफ़ होता है।।
हो सकता है इस दुनिया से अलग,
तेरी वहाँ धाक होती होगी।
तुझसे की गई हर फ़रियाद,
शायद वहाँ पूरी होती होगी।।
उस पार मुझे भी
इस बार किसी बहाने बुला।
जो अधूरा छोड़ रखा है,
उसे अब पूरा कर जा।।
मुझमें हिम्मत बस इतनी है,
कि तुझसे सवाल कर सकूँ।
उस पार बुलाकर एक बार,
अपनी नज़र से नज़र मिला।।
मैं भी जानूँ किस कलम से
तूने मेरी तक़दीर लिखी।
मुझे उस कलम की एक झलक दे,
जिसने मेरी दुनिया बदल दी।।
कब तलक यूँ ज़िंदा रखकर
मुझे नाच नचाएगा?
टूटकर पत्थर बन चुका हूँ,
अब और कितना आज़माएगा।।
जल्दी कर…
मुझे भी उस पार बुला ले।
बहुत हुई आँख-मिचौली,
अब मेरा भी हिसाब सुना ले।।
तू भी तो बता,
मैंने ऐसा क्या गुनाह किया?
बिना वजह ही
मुझे क्या से क्या बना दिया।।
भीगी आँखें मेरी
हर बार चुप हो जाती हैं।
ये दुनिया सही है,
बस मेरी ही ख़ता बताती है।।
अगर अभी भी
तेरा कोई हिसाब बाकी है,
तो आज ही पूरा कर दे।
इस सफ़र के खत्म होने से पहले,
मेरा ये खाता बंद कर दे।।
— MySoloWord
✍️ शब्द जो दिल से दिल तक
