मिलूंगा जब तुमसे रब सब बात तुम्हे बतलानी है।।
शिकायत ये रब तुझसे भी कितनी करू,
शिकायत ये रब तुझसे भी कितनी करू,
बिखरा सा हूँ अब बहुत, सायद अब समेटा ना जाऊँ. टूट गया हूं बहुत अब, शायद अब जोड़ा ना जाऊँ. गलने लगा हूं अब अंदर से, सायद ही फिर पनप पाऊँ. यारो तुम फिक्र ना करना अब, सायद ही अब शिकायत करने आऊँ. उजालों में अंधेरा सा लगता है अब,. शायद ही अंधेरों से निकल…
जब होती उनसे बात या कोई मुलाकात, दिल कहीं थम सा जाता है. होती है करनी बहुत बात, पर कहीं…… उनकी ही बातों पे ये दिल खो जाता है. छुप छुप के नजरे उनसे मिलती , उनके सामने होने के बाद भी । प्यार का इजहार करने को दिल करता तो बहुत लेकिन ये बहुत…
मेरा आना किसी के लिऐ तबाही ले लायी, किसी के सालो के रिश्तों मे खटास मुझ कारण आई।। जिस दोस्त के साथ मिलने लगा था चैन सुख थोडा, उसी दोस्त के लिए मेरा आना सुनामी ले आई। चाह कर भी ये खुदा तुझसे फरियाद क्या करू, मेरी किस्मत मे तो खामोशी तूने ही तो लिखवाई…
ये इन्तजार भी बहुत दर्द देती हैं, ये हर सब्र को बस तोड़ देती हैं।। आसान नही होता यूं इन्तजार मे वक्त बिताना, बिना शिकायत के बस चुप हो किए जाना।। इन्तजार कभी तन्हा अकेला कर देती हैं।। जब पता हो की इन्तजार के बाद भी इन्तजार है, सच कहता हुं तब ये अंदर से…
ऐसा नहीं है कि मैंने अब रोना छोड़ दिया है. दुखी अब भी होता हूँ बहुत पर बताना छोड़ दिया है. ऐसा नहीं मैंने सबके साथ रहना छोड़ दिया है, हाँ अकेला हूं बहुत इतने सारे अपनों के साथ, अब अपनों से कहना छोड़ दिया है ।। हाँ करता हूं मैं पहले जैसा ही प्यार…
एक दोस्त था मेरा, हाँ एक ही तो दोस्त था मेरा. जिससे हर दिल की हर बात करता था मैं , हाँ जिसे दिन रात परेशान करता था मैं . हाँ था तो वो दूर मुझसे, पर उसका साथ हर पल पास था मेरे. हर गम हर खुशी मे, उसका साथ था मेरे. हाँ एक दोस्त…