क़िस्मत का मारा ऐसा ! हंसना छोड़ो कब खुल कर रो पाऊंगा।।
क्या सोचते हैं लोग मुझे की मे संभल जाऊंगा,
क्या सोचते हैं लोग मुझे की मे संभल जाऊंगा,
नाराज़ खुद से हूँ, तुमसे कोई गिला कोई बात नहीं, वक़्त बदलता गया पर कमबख़्त ये मेरे हालात नहीं। हमने खोल दिए दिल के राज़ सारे-के-सारे, उन्हे शौक़ माद्दी रहा, समझना था मेरे जज़्बात नहीं। कर मेरे तू अपने रूह को कुछ यूँ रु-ब-रु, बहुत कर ली हमने, अब सिर्फ़ जिस्मानी मुलाक़ात नहीं। मय समझ…
शिकायत ये रब तुझसे भी कितनी करू, करते करते ये उम्र बीत जानी है।। मिलूंगा जब तुमसे तेरे घर पर, रब सब बात तुम्हे बतलानी है।। क्यो इतना मेरी खुशियों से जलता है तू, ये बात तुमसे ही कहलवांनी है।। मिलूंगा जब तुमसे रब सब बात तुम्हे बतलानी है।। क्या रजा तेरी मेरी ज़िन्दगी को,…
मैं वो कहानी हूं………….. किसी की अधूरी मोहब्बत और आंसुओं की जुबानी हूं, पूरी होते-होते रह गई, मैं वो अधूरी कहानी हूं..!! किस्से तो मेरे भी बहुत हुए इस अधूरी कहानी में, बस मशहूर ना हुए, मैं वो ख़ामोश कुर्बानी हूं।। बारिश तो बहुत तेज़ थी सफ़र में तूफ़ानों के साथ, हम फिर भी…
सालो की जरूरत नही किसी के खास बनने मे , चंद लम्हे ही काफ़ी है किसी को समझने के लिऐ।। मुझे ना पता की क्या वजह की तुम अपने से लगे, सायद जिसे कह सकूं दर्द अपन वो हम दर्द लगे।। काश की मे भी लड़ आता अपनी क़िस्मत से, उन्हे समझा पाता अपने हिसाब से।। जरूरी…
ये बर्ताव तेरा सिर्फ़ तकलीफ़ नहीं, मुझे हर पल बेचैन कर रहा है।। दूर तो हूँ तुझसे, फिर भी हर दुआ में साथ तेरा ही माँग रहा हूँ।। कसमों से बाँधकर खामोश हो गए हो, ना जाने किस बात पर मुझसे दूर हो गए हो।। एक बार पूछ लेते, मैं हालात भी बता देता। जो…
रात ढलते ही आज फिर से कलम उठा ली, कुछ लिखने के लिए सिरहाने मे रखी डायरी उठा ली, किस पर लिखू आज ये सोच ही रहा था ? ख्याल तो मन मे बहुत थे पर क्या लिखू बुझ नहीं रहा था। फिर अचानक अपनी डायरी-कलम को देखते ही, ख्याल एक आया साथी तुम अकेले…