ये मुस्कान जो मेरी बढ़ते जा रही हैं, दर्द को ये और अंदर से नासूर सा बना रही।।
ये मेरी मुस्कान क्यू बढ़ती जा रही हैं। बिना मतलब के मेरी हंसी क्यों थम ना रही हैं।। हर बात ना जाने क्यो अब समझ से परे लगती, ये मेरी समझ क्यो दिन पर दिन मरती जा रही हैं।। ये मेरी बात खुद से अब बढ़ती जा रही है, ख्यालों की दुनियां भी विरान होती…
