file 00000000ae448208932ca53cf043a170

ये राखी फिर रुलाएगी

ये राखी फिर रुलाएगी

ये राखी फिर रुलाएगी,
फिर तेरी याद लौट आएगी।।

जो दर्द हर दिन
दिल में दबा रहता है,
वो आज आँसुओं के रास्ते
बाहर आ जाएगा।।
हाँ…
ये राखी फिर रुलाएगी।।

याद आएगा फिर
वो हर वादा मेरा,
जो चाहकर भी
पूरा न कर सका इरादा मेरा।।

हर मोड़ पर
साथ निभाने का वचन दिया था,
पर किस्मत ने
वो रिश्ता अधूरा कर दिया था।।

ज़िक्र तेरा
फिर ज़रूर होगा,
जहाँ भी होगी तू,
बस तेरी सलामती की दुआ होगी।।

ये राखी फिर रुलाएगी,
तेरी याद आँखों में
फिर उतर आएगी।।

काश…
इस राखी तुम
कहीं से लौट आओ,
कह दो हँसकर,
“मेरा सगुन कहाँ है?”
और मुझसे फिर लड़ जाओ।।

पहले की तरह
अपना हाथ आगे बढ़ाना,
मैं मुस्कुराकर
तेरी कलाई पर राखी बाँध दूँ।
फिर तू प्यार से कहना—
“अब मेरा सगुन दो…”।।

हर साल की तरह
इस बार भी
इंतज़ार रहेगा,
काश एक बार आकर
सबको फिर से मुस्कुरा जाओ।।

सुन ऐ खुदा,
मेरी ये फ़रियाद
इस बार सच कर दे।
इस राखी जो आँसू आएँ,
वो बिछड़ने के नहीं,
मिलने की खुशी के हों।।

काश…
इस बार की राखी
दर्द नहीं,
खुशियों के आँसू दे जाए।।

— MySoloWord
✍️ शब्द जो दिल से दिल तक

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *