तुम को तुम नहीं… हम करने को दिल करता
तेरे एहसास से ही दिल खिल उठता,
तेरी तस्वीर से ही मन जी उठता।
देखता हूँ तुझे तो यूँ धड़कता है दिल,
बस तुझे ही देखते रहने को जी करता।।
खिलखिलाते तेरे इन लबों को छूने का दिल करता,
तुझे सीने से लगाकर तेरी धड़कन सुनने का दिल करता।
तेरे बालों को सहलाते हुए ढेर सारी बातें करने का दिल करता,
तेरे हाथों में हाथ रखकर लंबी सैर पर चलने का दिल करता।।
चलते-चलते कहीं थक जाओ तुम,
तो तुम्हें अपनी बाँहों में उठाकर ले चलने का दिल करता।
उमड़ते हुए इस प्यार को आँखों से बयाँ करने का दिल करता।
बैठें कहीं सुकून से,
तो तेरी गोद में सिर रखकर सो जाने का दिल करता।।
तुम को “तुम” नहीं… “हम” कहने को दिल करता,
बस तुम्हें प्यार… और बेइंतहा प्यार करने को दिल करता।।
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~ MySoloWord ✍️
*अल्फ़ाज़ ख़त्म हो सकते हैं, एहसास नहीं…* 🖤
