तेरे नज़दीक आते ही…
तेरे नज़दीक आते ही क्यों,
मेरा दिल क्यों धड़कता है..?
नहीं कुछ वास्ता अगर है,
क्यों दिल में तू धधकता है..?
वही मेरे भी दिल में है,
कहीं जो तेरे दिल में है।
प्यार तेरे दिल में छुपा हुआ,
क्यों मेरे दिल में छलकता है।।
ईश्वर तो एक होता है,
वही तुझ में झलकता है।
वही मुझ में तू बनकर धड़कता है;
उसी की बात करता हूँ,
तेरी जब बात करता हूँ।।
नहीं औरों में मिलता वो,
प्यार मुझे बस तुझ से ही मिलता है।
नहीं कुछ जो तुझ से कहूँ,
तो भरा हूँ मैं महफ़िल से…,
यहाँ महफ़िल में बस,
तू ही अपना… बस अपना लगता है।।
अगर प्यार नहीं,
तो सच बता…
मेरी याद में तेरे हाथ से,
ये प्याला क्यों छलकता है?
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~ MySoloWord ✍️
*अल्फ़ाज़ ख़त्म हो सकते हैं,
एहसास नहीं…* 🖤
