मेरा आना किसी के लिऐ तबाही लायी।।
मेरा आना किसी के लिऐ तबाही ले लायी,
मेरा आना किसी के लिऐ तबाही ले लायी,
जो साथ है उसकी कदर नहीं, जो दूर है उसकी तलाश चल रही. जिसे बनाया था अपना कभी, अब उसमे वो बात नहीं दिख रहीं. और जो अभी हुआ ही नहीं अपना, उसमें अब सब खूबी दिख रही. वाह रे इंसान प्यार बोलते हो तुम इसको, मुझे तो बस ये जिस्मों और वक़्त की भूख…
नाराज़ खुद से हूँ, तुमसे कोई गिला कोई बात नहीं, वक़्त बदलता गया पर कमबख़्त ये मेरे हालात नहीं। हमने खोल दिए दिल के राज़ सारे-के-सारे, उन्हे शौक़ माद्दी रहा, समझना था मेरे जज़्बात नहीं। कर मेरे तू अपने रूह को कुछ यूँ रु-ब-रु, बहुत कर ली हमने, अब सिर्फ़ जिस्मानी मुलाक़ात नहीं। मय समझ…
तन्हा राते ही अब मेरी साथी हो गयी, तुम्हे चाहने की जो खता हो गयी ।। समझाया सबने मगर ये दिल माना ही नही, ये भूल जो मुझसे बड़ी हो गयी।। रोका क्यू ना था मैंने दिल को अपने, क्यों देखें थे की तुम रहोगी ये सपने।। सपनों की अब मेरे इंतिहां हो गयी तुम्हे चाहने…
रात ढलते ही आज फिर से कलम उठा ली, कुछ लिखने के लिए सिरहाने मे रखी डायरी उठा ली, किस पर लिखू आज ये सोच ही रहा था ? ख्याल तो मन मे बहुत थे पर क्या लिखू बुझ नहीं रहा था। फिर अचानक अपनी डायरी-कलम को देखते ही, ख्याल एक आया साथी तुम अकेले…
ज़िंदगी ढूंढ ही लेगी, फिर से नया बहाना जीने का, ज़िंदगी बना ही लेगी फिर से नया ठिकाना रहने का।। वो जो आया था कुछ पल के लिए, अपनेपन का अहसास लिए।। कुछ खास सौगात लिए कुछ नये जज्बात लीये, मेरे दर्द को मिल बांट कर उसने कम करने का इरादा दिया, और साथी साथ…
एक पल लगता सब सही हो गया, ना जाने दुजे पल सब फिर बदल जाता।। रुक रुक कर चलने की आदत भी हो गई, ना जाने फिर भी मन कंही क्यों लग नही पता।। बस अब लोग कहने लगे है मुझे मै बदल सा गया हुं, थोडा गुस्सैल और घमंडी ना बोलने वाला हो गया…