कैसे खुद को अब समझाऊं कैसे.?
सीधा सा इंसान ना जाने क्यु प्यार किया मुझे उसने,
सीधा सा इंसान ना जाने क्यु प्यार किया मुझे उसने,
जिंदगी मे आने की ख्वाहिश भी उसकी थी , छोड़ जाने का फैसला भी उन्हीं का था. दिल की हर बात बताने की आदत भी उन्हीं की थी, और आज हर बात छुपाने का हुनर भी उन्हीं का था. सबसे खाश बनाकर पास रखकर , वो सपना दिखा कर हंसाने वाली भी वो थी. और…
साथ रहना ही साथ नहीं होता. दिन भर बात करते रहना ही साथ नहीं होता. एक मेरी भी जिंदगी जो दूर है मजबूर है लकिन हर पल साथ है………….. माना कि अब वो नहीं दे पाते वक़्त पर कोई गिला नहीं, उनके हिस्से का वक़्त हम खुद को दे लेते हैं. हाँ दूर है पर…
शिकायत ये रब तुझसे भी कितनी करू, करते करते ये उम्र बीत जानी है।। मिलूंगा जब तुमसे तेरे घर पर, रब सब बात तुम्हे बतलानी है।। क्यो इतना मेरी खुशियों से जलता है तू, ये बात तुमसे ही कहलवांनी है।। मिलूंगा जब तुमसे रब सब बात तुम्हे बतलानी है।। क्या रजा तेरी मेरी ज़िन्दगी को,…
कसमकश ये कैसी ये कैसी है उदासी, दिल तो करता बहुत कुछ, पर हालातों की मायूसी। किस डगर किस राह को पकड़ ये जिंदगी बितायूं? किस तरह तुझे अपना हमसफर बनाऊं, यूं अभी तो साथ तेरा मुझे मिलना ये किस्मत पर छोड़ा, तू क़िस्मत से ही तो था मेरी जिंदगी में मुझसे था जुड़ा।। कसमकश ये…
कहना तो बहुत कुछ चाहता हु तुझसे, पर कह कहा पाता हूं। सच तो है जीना है तेरे बगैर, पर एक पल भी कहा रह पाता हूं। कोशिश हर बार होती है तुझे भुलाने की, पर एक पल भी कहा भूला पाता हूं। कहना तो बहुत कुछ चाहता हु तुझसे, पर कह कहा पाता हूं………………..।…
नाराज़ खुद से हूँ, तुमसे कोई गिला कोई बात नहीं, वक़्त बदलता गया पर कमबख़्त ये मेरे हालात नहीं। हमने खोल दिए दिल के राज़ सारे-के-सारे, उन्हे शौक़ माद्दी रहा, समझना था मेरे जज़्बात नहीं। कर मेरे तू अपने रूह को कुछ यूँ रु-ब-रु, बहुत कर ली हमने, अब सिर्फ़ जिस्मानी मुलाक़ात नहीं। मय समझ…