बहुत ख़ास है आपका हर एक पल
जब होती उनसे बात या कोई मुलाकात,
जब होती उनसे बात या कोई मुलाकात,
चाहत ना रख कोई बात नहीं, रिश्ता ना रख कोई बात नहीं. पर जो था पहले कभी हम दोनों मे जो, उन याद को कैसे भुलाउ ये बता तो सही. तुम तो चली गए एक पल मे सब छोड़ कर, मैं भी तेरी तरह बेग़ैरत कैसे बनूँ ये सीखा तो सही. चल मान लिया तू…
आसान नहीं होता खुद से बांते करना, यूं हर एक बात मन में ख़ुद से ही करना।। अकेलेपन से गुजरने के बाद ये मुकाम हासिल होता। हर राह पे टूटने और छुटने के बाद ये होता।। हर एक उम्मीद जब बिखेरे तब ।। जब हर रात खुली आंखो से गुजरे।। जब बाते बहुत हो कहने…
ज़िंदगी ढूंढ ही लेगी, फिर से नया बहाना जीने का, ज़िंदगी बना ही लेगी फिर से नया ठिकाना रहने का।। वो जो आया था कुछ पल के लिए, अपनेपन का अहसास लिए।। कुछ खास सौगात लिए कुछ नये जज्बात लीये, मेरे दर्द को मिल बांट कर उसने कम करने का इरादा दिया, और साथी साथ…
रात ढलते ही आज फिर से कलम उठा ली, कुछ लिखने के लिए सिरहाने मे रखी डायरी उठा ली, किस पर लिखू आज ये सोच ही रहा था ? ख्याल तो मन मे बहुत थे पर क्या लिखू बुझ नहीं रहा था। फिर अचानक अपनी डायरी-कलम को देखते ही, ख्याल एक आया साथी तुम अकेले…
सब भुल जाऊं तो जाऊं कहा, पलकों से अपने इस दर्द को छुपाऊं कहा।। आंखों मे आंसू तो छुपा लेता हूं दिन मे, पर ये रात को दर्द भुलाऊं तो भुलाऊं कहा।। काश की ये रात ना होती, ये अपनो की यादें ना होती।। दिन तो गुजार लेते खुद को मिटा कर, काश की रातों…
कहना तो बहुत कुछ चाहता हु तुझसे, पर कह कहा पाता हूं। सच तो है जीना है तेरे बगैर, पर एक पल भी कहा रह पाता हूं। कोशिश हर बार होती है तुझे भुलाने की, पर एक पल भी कहा भूला पाता हूं। कहना तो बहुत कुछ चाहता हु तुझसे, पर कह कहा पाता हूं………………..।…