अब लिखने के लिए शब्द भी है
इस तरह टूटा हूं की अब लिखने के लिए शब्द भी नहीं,
इस तरह टूटा हूं की अब लिखने के लिए शब्द भी नहीं,
जब होती उनसे बात या कोई मुलाकात, दिल कहीं थम सा जाता है. होती है करनी बहुत बात, पर कहीं…… उनकी ही बातों पे ये दिल खो जाता है. छुप छुप के नजरे उनसे मिलती , उनके सामने होने के बाद भी । प्यार का इजहार करने को दिल करता तो बहुत लेकिन ये बहुत…
सीधा सा इंसान ना जाने क्यु प्यार किया मुझे उसने, खूबी ना हैसियत फिर भी सब वार दिया उसने. कभी सोचा नहीं थे वो सपने क्यु दिए मुझे, जो हो ना सकते थे पूरे वो वादे क्यु किए मुझे. कभी कोई आया ही नहीं था आप जैसा, अब यूँ बदल जाने पे जी सकू कैसे.?? …
गुम गए सब जिन्हें ढूंढ कर संभाला था, तिनका तिनका से बना आशियाना उजाड़ डाला। जितनी खुशी उस आशियाने के […]
दाद देते हैं तुम्हारे नजर अंदाज करने के हुनर को, जिसने भी सिखाया उस्ताद कमाल का होगा.| क्यु शर्मिंदा करते हो रोज यूँ हाल पूछकर, हाल हमारा वहीं है जो तुमने बना रखा है.| मिल गये होगी गज़ब की मजबूरी कोई, वर्ना मेरा यार यूँ बदलने वाला ना था | नींद भी नीलाम हो जाती…
एक पल में अपना बन कर लोग आते हैं। एक पल में पराया कर लोग चले जाते है। आते है जब हसीन दुनिया सी बना देते, और जाते हैं जब सब तबाह ये कर जाते है। एक पल में अपना बन कर लोग कुछ आते हैं। इक पल में ही पराया कर छोड़ चले जाते…
तुम भी छोड़ गये………. अब किस किस बात पर करू यकीन, किस को कहूं की फिर से टूट गया, जो था मेरा अपना वो मुझसे छूट गया।। ना जाने क्यूं मेरे ही हिस्से मे ये आता, हर बार मैं ही खुद को अकेला हूं पाता।। तुम भी छोड़ गये….. अब भी मैं कैसे खुद को…