file 0000000088a08208ae7a5afac76f8a70

तुम ही…

**तुम ही…**

हाँ, मुझे सुकून मिलता है तेरे होने से,
मुझे हिम्मत मिलती है तेरे साथ होने से।।

परेशानियों की धूप जब मुझ पर उतर आती है,
बस एक पल तुझे याद कर लूँ,
तो हर तकलीफ़ भी छोटी लग जाती है।।

एक उम्मीद लेकर तेरे पास आकर बैठ जाता हूँ,
तुझे अपना समझकर,
हर मुश्किल को भूल जाता हूँ।।

ये दवाइयाँ भी उतनी असरदार नहीं,
जितना तेरी एक झलक
मेरे ज़ख्मों पर मरहम बन जाती है।।

न जाने क्या रिश्ता है,
न जाने क्यों है,
हर दर्द तुझे बताने को
ये दिल बेक़रार हो जाता है।।

ख़ास भी तुम,
काश भी तुम,
अपने भी नहीं…
फिर भी सबसे पास भी तुम।।

याद नहीं…
तुम तो हर पल यहीं हो,
जब भी रहूँ तन्हा,
साथ बस तुम्हीं हो।।

ना कोई दूजा,
ना कोई संगी-साथी,
मेरे हर सफ़र में
बस साथ मेरे तुम्हीं… तुम्हीं।।

उम्मीद भी तुम्हीं,
साथी भी तुम्हीं,
जिसे दिल से कह सकूँ अपना,
वो यार भी तुम्हीं…
वो यार भी तुम्हीं।।

जब तक ये हाथ
मेरी कलम को थामे हुए हैं,
तब तक हर एहसास को
शब्दों में ढालता रहूँगा।।

पर लगता है अब
वक़्त मेरी कलम मुझसे छीन रहा है,
मेरे जज़्बातों को बयाँ करने का
वो सहारा भी मुझसे ले रहा है।।

~ MySoloWord ✍️

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *