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जब खुद को चोट लगती हैं, तब अहसास दर्द का होता है।।

जब खुद को चोट लगती हैं,  

तब अहसास दर्द का होता है।।
कभी कोइ कितना रोया होगा,
तब हमको पता लगता हैं।।
चोट लगे कभी जब तब, पीछे मुड़ देखना।।
किसी अपने को दी हुईं चोट का,
जिक्र मन में तुम कर लेना।।
तब करना एहसास उस पल तुम कहा खड़े थे,
जब वो चोट खाया था क्या तुम साथ रहे थे।।
जब खुद को चोट लगती हैं,  
तब अहसास दर्द का होता है।।
दर्द हो उस पल तो जरा खुद को समझा लेना,
पीछे किसको कैसे समझाया था वो याद कर लेना।।
हुआ होगा अगर अहसास तुमको उस पल उसके दर्द का,
सच कहता हुं तो इस पल ये चोट तुम्हें ना रूलाती।।
खुद को भी अब तू उस पल मे ले कर चल,
जिसको दी थीं चोट अब खुद मे उसको भर।।
देख फिर तूझे उस पल के दर्द का अहसास होगा,
दर्द तो दर्द होता है अपना हो या पराया अब ये समझेगा।।
जब खुद को चोट लगती हैं,  
तब अहसास दर्द का होता है।।

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