आसान नहीं होता ख़ुद से बातें करना
आसान नहीं होता ख़ुद से बातें करना,
यूँ हर एक बात मन में ख़ुद से ही करना।।
अकेलेपन से गुज़रने के बाद
ये मुकाम हासिल होता है,
हर राह पर टूटने
और अपनों से छूटने के बाद
ये एहसास पैदा होता है।।
हर एक उम्मीद जब बिखर जाती है,
जब हर रात खुली आँखों से गुज़रती है।
जब कहने-सुनने को बहुत कुछ हो,
और साथ देने वाला कोई न हो।।
तब बातें ख़ुद से ही
ख़ुद में होने लगती हैं,
उस पल बस दिल मेरा
यही कहने लगता है।।
ख़ुद से बातें करना इतना आसान नहीं होता,
बहुत कुछ बिखरने के बाद ये हुनर मिलता है।।
बहुत कुछ छूट जाने के बाद
ये सलीका आता है,
जब कोई साथी, कोई दोस्त न हो,
तब ये वक़्त आता है।।
हिम्मत चाहिए ख़ुद से मिलने के लिए,
ख़ुद से गिला, ख़ुद से शिकवा,
और ख़ुद को ही गुनहगार मान लेना…
ये सब तन्हाई के बाद ही हो पाता है।।
जब किसी से मिलने की
हर उम्मीद टूट जाती है,
तब इंसान
ख़ुद से बातें करना सीख जाता है।।
आसान नहीं होता ख़ुद से बातें करना,
यूँ हर एक बात ख़ुद से ही करना।।
चाह भी ख़ुद की नहीं रहती जब,
सुध भी कहीं खो जाती है तब।।
जब अपनों से दूर होने लगते हैं,
बिना वजह चुप और खोए रहने लगते हैं।।
तब ख़ामोशी से
एक अटूट रिश्ता बन जाता है,
और इंसान ख़ुद से बातें करके
ख़ुद को समझाने लगता है।।
आसान नहीं होता ख़ुद से बातें करना,
यूँ हर एक बात ख़ुद से ही करना।।
जब हर राह, हर मोड़ वीरान लगने लगे,
जब सफ़र बिना हमसफ़र के कटने लगे।।
जब छाँव में भी धूप लगने लगे,
बिन बारिश आँखें भीगने लगें।।
जब मंज़िल का कोई पता न हो,
तब बातें ख़ुद से ही होने लगती हैं।।
उस घड़ी, उस पल
बस इतना समझ आता है—
हाँ, मैं अब अकेला हूँ,
थोड़ा बिखरा हुआ हूँ…
मगर अब ख़ुद का सहारा हूँ।।
आसान नहीं होता ख़ुद से बातें करना,
यूँ हर एक बात ख़ुद से ही करना।।
~ MySoloWord ✍️
रिश्ते ख़त्म हो सकते हैं,
एहसास और अल्फ़ाज़ नहीं… 🖤
