कुछ अनकही बाँते
कुछ अनकहीं बाते.. ना वो कलम लिख पाई.. ना वो लफ़्ज़ मिल पाए.. सुकून तेरी वो मुस्कान से ही मिलता है.. दर्द आज भी तुझसे दूर रहने मे उठता है.. पता है वो मेरे लिखे खत तुझे न ला सकेंगे पर यादो में तो तुझे ही बस तुझे ही बसा सके.. तेरी तसवीर ही है…
