ture_love

  • Gulzar Poetry कुछ अह्सास गुलजार के कुछ हमारे.

    दाद देते हैं तुम्हारे नजर अंदाज करने के हुनर को, जिसने भी सिखाया उस्ताद कमाल का होगा.| क्यु शर्मिंदा करते हो रोज यूँ हाल पूछकर, हाल हमारा वहीं है जो तुमने बना रखा है.| मिल गये होगी गज़ब की मजबूरी कोई, वर्ना मेरा यार यूँ बदलने वाला ना था | नींद भी नीलाम हो जाती…

  • बदलते रिश्ते

    अजीब सी हो  गई  ये जिन्दगी, ना ही इधर की ना ही उधर की.  एक वो भी था जिसे चाहा था हमने,  और जिसे सभी वक्त मे आगे रखा हमने.  पर क्या पता था जिसे देंगे वो वक्त अपना,  जो हमारी नींद का था……. आज वही हमको बोले प्यार नहीं मेरे दोस्त,.  बस दोस्ती का रिश्ता…