Gulzar Poetry कुछ अह्सास गुलजार के कुछ हमारे.
दाद देते हैं तुम्हारे नजर अंदाज करने के हुनर को, जिसने भी सिखाया उस्ताद कमाल का होगा.| क्यु शर्मिंदा करते हो रोज यूँ हाल पूछकर, हाल हमारा वहीं है जो तुमने बना रखा है.| मिल गये होगी गज़ब की मजबूरी कोई, वर्ना मेरा यार यूँ बदलने वाला ना था | नींद भी नीलाम हो जाती…
