अब लिखने के लिए शब्द भी है
इस तरह टूटा हूं की अब लिखने के लिए शब्द भी नहीं,
इस तरह टूटा हूं की अब लिखने के लिए शब्द भी नहीं,
रात ढलते ही आज फिर से कलम उठा ली, कुछ लिखने के लिए सिरहाने मे रखी डायरी उठा ली, किस पर लिखू आज ये सोच ही रहा था ? ख्याल तो मन मे बहुत थे पर क्या लिखू बुझ नहीं रहा था। फिर अचानक अपनी डायरी-कलम को देखते ही, ख्याल एक आया साथी तुम अकेले…
एक पल में अपना बन कर लोग आते हैं। एक पल में पराया कर लोग चले जाते है। आते है जब हसीन दुनिया सी बना देते, और जाते हैं जब सब तबाह ये कर जाते है। एक पल में अपना बन कर लोग कुछ आते हैं। इक पल में ही पराया कर छोड़ चले जाते…
तू वो सपना मेरा जिसकी चाहत मुझे हर नीद मे आती ।। तू वो ख्याल मेरा जिसकी याद हर ख्याल मे आती. वो मुस्कान तुम मेरी, जो हर ग़म भुला देती वो इबादत तू मेरी जो तुझमे रब से मिला देती. वो बारिश तू मेरी, हर आंसू को बहा देती. तुझ बिन जीना है ये…
दाद देते हैं तुम्हारे नजर अंदाज करने के हुनर को, जिसने भी सिखाया उस्ताद कमाल का होगा.| क्यु शर्मिंदा करते हो रोज यूँ हाल पूछकर, हाल हमारा वहीं है जो तुमने बना रखा है.| मिल गये होगी गज़ब की मजबूरी कोई, वर्ना मेरा यार यूँ बदलने वाला ना था | नींद भी नीलाम हो जाती…
जब होती उनसे बात या कोई मुलाकात, दिल कहीं थम सा जाता है. होती है करनी बहुत बात, पर कहीं…… उनकी ही बातों पे ये दिल खो जाता है. छुप छुप के नजरे उनसे मिलती , उनके सामने होने के बाद भी । प्यार का इजहार करने को दिल करता तो बहुत लेकिन ये बहुत…
तेरे नज़दीक आते ही क्यूँ . मेरा दिल क्यू धड़कता है.. ? नहीं कुछ वास्ता अगर है . क्यूँ दिल […]