Blog Post 53 92779751

नज़र भर देख लिया छुपकर उनको , पर लबों की बात बस लबों मे दबी सी रह गई है।

ख़लिश दिल में दबी सी रह गई है।
तेरे बिन इक कमी सी रह गई है।
मिटाई याद तेरी ख़त जला कर ,
मगर फिर भी दिल से जुड़ी सी रह गई ।
उदासी रुख से पोंछी जैसे तैसे,
निगाहों में फिर भी नमी सी रह गई ।
नहीं कोई ख़ुशी है जिंदगी में अब,
गमों से जूझती सी जिंदगी रह गई।
नहीं मिलते जवाबों के निशाँ जब तक मुझे ,
सवालों से घिरी सी ये जिंदगी रह गई ।
रिश्तों को नाम देते अपनों का बना देते खास ,
पर अपनों को चुनने में ये डोर एक दम से टूट गई।।
नज़र भर देख लिया छुपकर उनको ,
पर लबों की बात बस लबों मे दबी सी रह गई है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *