क़िस्मत का मारा ऐसा ! हंसना छोड़ो कब खुल कर रो पाऊंगा।।
क्या सोचते हैं लोग मुझे की मे संभल जाऊंगा,
क्या सोचते हैं लोग मुझे की मे संभल जाऊंगा,
नींदों में सपने सपनो में अपने , जरा तुम, संभल कर सपनों में आना।। देखे ना तुमको जो सोचे ना तुमको, फिर भी बिन बातो के याद आना तुम्हारा।। कैसे कहें ! कैसे रहे ? यादों को मुश्किल भुलाना बडा ।। ख़ामोश हम बिना कुछ कहें ज़रा सा हम अलग से हो…
बिखरा सा हूँ अब बहुत, सायद अब समेटा ना जाऊँ. टूट गया हूं बहुत अब, शायद अब जोड़ा ना जाऊँ. गलने लगा हूं अब अंदर से, सायद ही फिर पनप पाऊँ. यारो तुम फिक्र ना करना अब, सायद ही अब शिकायत करने आऊँ. उजालों में अंधेरा सा लगता है अब,. शायद ही अंधेरों से निकल…
ऐसा नहीं है कि मैंने अब रोना छोड़ दिया है. दुखी अब भी होता हूँ बहुत पर बताना छोड़ दिया है. ऐसा नहीं मैंने सबके साथ रहना छोड़ दिया है, हाँ अकेला हूं बहुत इतने सारे अपनों के साथ, अब अपनों से कहना छोड़ दिया है ।। हाँ करता हूं मैं पहले जैसा ही प्यार…
सब भुल जाऊं तो जाऊं कहा, पलकों से अपने इस दर्द को छुपाऊं कहा।। आंखों मे आंसू तो छुपा लेता हूं दिन मे, पर ये रात को दर्द भुलाऊं तो भुलाऊं कहा।। काश की ये रात ना होती, ये अपनो की यादें ना होती।। दिन तो गुजार लेते खुद को मिटा कर, काश की रातों…
मै अकेला मै अकेला, हो रहा हूं मैं अकेला. छूट रहे अब साथ सारे जिनका था कभी मेला. वक्त की मार ही ऐसी साथ छूटे वक्त के साथी. सन्ध्या का अब इंतजार होता बस मै अकेला मै अकेला . किस भ्रम में रखा था मैंने जीवन का ये खेला,… साथी साथ रहते हर दम वक्त…
सब खत्म नहीं होता, कोई जुदा नहीं होता।। छोड़ के चले जाने वाला, हर कोई बुरा नहीं होता।। बस कुछ बात मन जाती, किसी की बात ठन जाती।। किसी की मजबूरी कभी सजा दूरी ही बन जाती।। नही तो कौन शख्स इतना खुदगर्ज है होता, जिसे दिल से हो माना अपना वो जुदा नहीं होता ।।…