क़िस्मत का मारा ऐसा ! हंसना छोड़ो कब खुल कर रो पाऊंगा।।
क्या सोचते हैं लोग मुझे की मे संभल जाऊंगा,
क्या सोचते हैं लोग मुझे की मे संभल जाऊंगा,
ऐसा नहीं है कि मैंने अब रोना छोड़ दिया है. दुखी अब भी होता हूँ बहुत पर बताना छोड़ दिया है. ऐसा नहीं मैंने सबके साथ रहना छोड़ दिया है, हाँ अकेला हूं बहुत इतने सारे अपनों के साथ, अब अपनों से कहना छोड़ दिया है ।। हाँ करता हूं मैं पहले जैसा ही प्यार…
ऐसी तकदीर लाऊं कहा से।। एक दोस्त सच्चा पाऊं कहा से।। पल पल मरते जा रहा हूं फिर भी तो मैं जिए जा रहा हूं।। गुस्ताख़ ये यकीं की ये सजा पाऊं कहा से।। लड़ तो जाऊं तूझसे ये मेरी किस्मत लिखने वाले, पर साथ मेरे जो पीछे खड़ा हो उस पल, साथ देने वाला…
आसान नहीं होता खुद से बांते करना, यूं हर एक बात मन में ख़ुद से ही करना।। अकेलेपन से गुजरने के बाद ये मुकाम हासिल होता। हर राह पे टूटने और छुटने के बाद ये होता।। हर एक उम्मीद जब बिखेरे तब ।। जब हर रात खुली आंखो से गुजरे।। जब बाते बहुत हो कहने…
जब खुद को चोट लगती हैं, तब अहसास दर्द का होता है।। कभी कोइ कितना रोया होगा, तब हमको पता लगता हैं।। चोट लगे कभी जब तब, पीछे मुड़ देखना।। किसी अपने को दी हुईं चोट का, जिक्र मन में तुम कर लेना।। तब करना एहसास उस पल तुम कहा खड़े थे, जब वो चोट…
रात ढलते ही आज फिर से कलम उठा ली, कुछ लिखने के लिए सिरहाने मे रखी डायरी उठा ली, किस पर लिखू आज ये सोच ही रहा था ? ख्याल तो मन मे बहुत थे पर क्या लिखू बुझ नहीं रहा था। फिर अचानक अपनी डायरी-कलम को देखते ही, ख्याल एक आया साथी तुम अकेले…
छोटे – छोटे लम्हे बड़ा ना सके हम, उन लम्हों को अपना बना ना सके हम। किसे कहे अपना तू साथी मेरा है, किसे कहे दोस्त तू यार मेरा है।। जैसे ही किसी को अपना समझते हम, उस पल से ही वो बदल जाते एकदम। मिले तो बहुत हमे अपना कहने वाले, पर किसी को…