कभी लिखता दिल के अरमां किताबों में, कभी फिर उन किताबो को पड़ता ।।
नींदों में सपने सपनो में अपने , जरा तुम, संभल कर सपनों में आना।। देखे ना तुमको जो सोचे ना तुमको, फिर भी बिन बातो के याद आना तुम्हारा।। कैसे कहें ! कैसे रहे ? यादों को मुश्किल भुलाना बडा ।। ख़ामोश हम बिना कुछ कहें ज़रा सा हम अलग से हो…
