आंखों मे आंसू तो छुपा लेता हूं दिन मे, पर ये रात को दर्द भुलाऊं तो भुलाऊं कहा।।
सब भुल जाऊं तो जाऊं कहा,
सब भुल जाऊं तो जाऊं कहा,
चाहत ना रख कोई बात नहीं, रिश्ता ना रख कोई बात नहीं. पर जो था पहले कभी हम दोनों मे जो, उन याद को कैसे भुलाउ ये बता तो सही. तुम तो चली गए एक पल मे सब छोड़ कर, मैं भी तेरी तरह बेग़ैरत कैसे बनूँ ये सीखा तो सही. चल मान लिया तू…
मिले जो उनसे हमको एक अरसा हो गया, एजी देखें उनको हमे जमाना बीत गया। फिर भी ओ जानी तू क्यों भुला नहीं जाता, जख्म दिया तेरा हर एक भुलाया नहीं जाता।। अब तो मेरे तू ख्यालों से तो जा, आंखे जब करू बंद जानी अब सामने ना आ।। अब और क्या दूं तुझे सब…
अजीब सी हो गई ये जिन्दगी, ना ही इधर की ना ही उधर की. एक वो भी था जिसे चाहा था हमने, और जिसे सभी वक्त मे आगे रखा हमने. पर क्या पता था जिसे देंगे वो वक्त अपना, जो हमारी नींद का था……. आज वही हमको बोले प्यार नहीं मेरे दोस्त,. बस दोस्ती का रिश्ता…
छोटे – छोटे लम्हे बड़ा ना सके हम, उन लम्हों को अपना बना ना सके हम। किसे कहे अपना तू साथी मेरा है, किसे कहे दोस्त तू यार मेरा है।। जैसे ही किसी को अपना समझते हम, उस पल से ही वो बदल जाते एकदम। मिले तो बहुत हमे अपना कहने वाले, पर किसी को…
एक दोस्त था मेरा, हाँ एक ही तो दोस्त था मेरा. जिससे हर दिल की हर बात करता था मैं , हाँ जिसे दिन रात परेशान करता था मैं . हाँ था तो वो दूर मुझसे, पर उसका साथ हर पल पास था मेरे. हर गम हर खुशी मे, उसका साथ था मेरे. हाँ एक दोस्त…
बिखरा सा हूँ अब बहुत, सायद अब समेटा ना जाऊँ. टूट गया हूं बहुत अब, शायद अब जोड़ा ना जाऊँ. गलने लगा हूं अब अंदर से, सायद ही फिर पनप पाऊँ. यारो तुम फिक्र ना करना अब, सायद ही अब शिकायत करने आऊँ. उजालों में अंधेरा सा लगता है अब,. शायद ही अंधेरों से निकल…