नज़र भर देख लिया छुपकर उनको , पर लबों की बात बस लबों मे दबी सी रह गई है।
ख़लिश दिल में दबी सी रह गई है। तेरे बिन इक कमी सी रह गई है। मिटाई याद तेरी ख़त […]
ख़लिश दिल में दबी सी रह गई है। तेरे बिन इक कमी सी रह गई है। मिटाई याद तेरी ख़त […]
ये मेरी मुस्कान क्यू बढ़ती जा रही हैं। बिना मतलब के मेरी हंसी क्यों थम ना रही हैं।। हर बात ना जाने क्यो अब समझ से परे लगती, ये मेरी समझ क्यो दिन पर दिन मरती जा रही हैं।। ये मेरी बात खुद से अब बढ़ती जा रही है, ख्यालों की दुनियां भी विरान होती…
गम तो गम फिर भी जिए जाना है, हंस हंस कर हर किसी को दिखाना है।। बुरे हालात बुरे चहरे कहा किसी को रास आते, लोगों को चहरा रंग बदल कर दिखाना है।। पूछता है यहां हर कोई क्यू रिश्ते मे ये बता, रिश्तों को आजकल शक की निगाह से देखा जाता।। क्यों कोई जुड़े…
सब भुल जाऊं तो जाऊं कहा, पलकों से अपने इस दर्द को छुपाऊं कहा।। आंखों मे आंसू तो छुपा लेता हूं दिन मे, पर ये रात को दर्द भुलाऊं तो भुलाऊं कहा।। काश की ये रात ना होती, ये अपनो की यादें ना होती।। दिन तो गुजार लेते खुद को मिटा कर, काश की रातों…
ये राखी फिर रुलायेगी, फिर मेरी याद लौट आयेगी।। जो दर्द हर दिन दबा रहता दिल मे, वो याद आंसू के रस्ते आयेगी।। ये राखी फिर रुलायेगी।।। याद आयेगा फिर से वो वादा मेरा, जो कर ना सका पूरा वो इरादा मेरा।। जिसकी हर मोड़ पर साथ देने का वादा मेरा, वो पूरा ना कर…
आसार मेरे ये तो ज़माने के लिए हैं, कुछ अल्फ़ाज़ उन्हें सुनाने के लिए हैं।। पलकों में जो भर लोगे इन्हें, तो काँटों-से चुभने लगेंगे। कुछ ख़्वाब तो सिर्फ़ आँखों में सजाने के लिए होते हैं।। हर दुआ मुकम्मल हो जाए, ये ज़रूरी तो नहीं। कुछ इंतज़ार सिर्फ़ सब्र सिखाने के लिए होते हैं।। अब…
तेरे नज़दीक आते ही क्यूँ . मेरा दिल क्यू धड़कता है.. ? नहीं कुछ वास्ता अगर है . क्यूँ दिल […]
दाद देते हैं तुम्हारे नजर अंदाज करने के हुनर को, जिसने भी सिखाया उस्ताद कमाल का होगा.| क्यु शर्मिंदा करते हो रोज यूँ हाल पूछकर, हाल हमारा वहीं है जो तुमने बना रखा है.| मिल गये होगी गज़ब की मजबूरी कोई, वर्ना मेरा यार यूँ बदलने वाला ना था | नींद भी नीलाम हो जाती…
चहरे पे एक मुस्कान सी आ जाती है, तुम्हारे ऑनलाइन आने से. इस पागल की सारी खुशिया तुमसे है,-आधी तुम्हें मनाने से और आधी तुम्हें सताने से. जब तुम हस्ती हो तो, दिल मेरा चहक उठता, जब होती sad आप तो मन बस रोने को करता. नहीं लगता जी कहीं भी किसी भी बहाने से, …
क्यु दर्द की बात करे, क्यु ज़ज्बात के घाव करे हरे. मिली थी जिन्दगी उसे मेरे आने से पहले. तो उसकी जिन्दगी भी क्यु बर्बाद करे?? हाँ एक पल नहीं हर पल के साथ की चाह थी, सुख और दुख मिलके बताने और बांटने की आश थी. नहीं हो सका अगर ये मुमकिन तो, क्यु…